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(मानसिक-भावनात्मक चिन्ह) Mental Emotional Symbol से-हे-की Sei-He-Ki

यह सिंबल मानसिक या भावनात्मक व्याधियाँ से छुटकारा पाने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह हमारे बायें तथा दायें दिमाग में संतुलन पैदा करके इस संबंधी समस्याओं का समाधान करता है। नर्वस होना, भय, डिपरैशन, गुस्सा, दुःख आदि का उपचार करने के लिए हम इस चिन्ह को प्रयोग में ला सकते हैं।
व्यापक आदतें जैसे नशा खोरी, सिगरेट नोशी, भांग अथवा चर्स जैसे विभचारों से छुटकारा पाने के लिए इस चिन्ह से काम लिया जाता है। याद शक्ति को बढ़ाने के लिए, किसी नाम का भूल जाना, रखी हुई वस्तु को भूल जाना, भूली विसरी यादों को ताजा करने के लिए यह सिंबल हमारी मदद करता है।
बहुत सारी ऐसी बिमारीयां हैं जो पहले हमारे अन्दर मानसिक या भावनात्मक स्तर पर घर करती हैं बाद में यह शारीरिक बिमारी के रूप में प्रगट होती हैं। इसका उपयोग एकाग्रता की कमी, उदासीनता, मानसिक दुर्बलता, क्रोध, भय, अवसाद (Depression) में किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसे पारिवारिक कलह, श्रतुता आदि को शांत करने के लिए भी किया जाता है तथा निम्न व्याधीयों के समाधान के लिए भी से-हे-की का आवाह्य किया जाता हैः-

  1. अवरूद्ध याद शक्ति
  2. भूल जाने की आदत
  3. बुरी आदतों से छुटकारा पाने के लिए
  4. शारीरिक वजन को कम या ज्यादा करने के लिए।
  5. आत्म संयम, आत्म विश्वास, साहस आदि गुणों के विकास के लिए।
  6. शोक या अत्यधिक दुख से छुटकारा पाने के लिए।
  7. खोई हुई वस्तुओं को ढूंढने के लिए।
  8. किसी लिखित समग्री को कण्ठ करने के लिए।
    क्योंकि रेकी ऊर्जा हमारी अपनी नहीं है, यह सर्वोत्तम शक्ति है, अतः रेकी से प्रचलित परिणामें से हमें यह उम्मीद रखनी चाहिए कि जो कुछ भी होगा वह ठीक व हमारे भले के लिए ही होगा।
    इस सिंबल को कहां बनाया जाता है।
  9. कनपटीयों पर
  10. आज्ञा (Third Eye) चक्र पर
  11. हृदय (Heart) चक्र पर
  12. मणीपुर (Solar) चक्र पर
    इस चिन्ह को दुसरे दो या दो से ज्यादा चिन्हों के बीच में बनाया जाता है। स्वतंत्र रूप में से-हे-की सिंबल का प्रयोग नहीं किया जाता, जैसे चो-कु-रे + से-हे-की + चो-कु-रे।
    इस तरह से-हे-की के आगे तथा पीछे पावर सिंबल या और किसी सिंबल का प्रयोग करना अनिवार्य है।
    यह चिन्ह हमें इश्वरीय भावना में तल्लीन हाने में सहायता करता है। हमारा शरीर जो ‘‘प्रभु का घर है, हमारे मन को एक सूत्र में बांधता है। सदभावना से रेकी-उपचार देना रेकी की आत्मा है अतः ये सिंबल इस नियम का प्रति रूप है।
    यह सिंबल प्राचीन संस्कृत अः अक्षर का प्रतिरूप कहा जा सकता है। प्राचीन बोधी सूत्रों के अनुसार अः वह है जो कण-कण में विचरता है।
    से-हे-की एक बीज रूप सिंबल है, वह ब्रह्मंडी शक्ति, जिसकी सहायता से मनुष्य ऊँची अवस्था को प्राप्त करता है तथा ‘‘ब्रह्म’’ से, एक रूप होता है तथा आत्मज्ञान को प्राप्त करता है। एक और विचार अनुसार यह सिंबल उस योद्धा को कायल करने का सूचक है जिसकी आज्ञा से कोई विचार हमारे अव-चेतन मन में प्रवेश करता है अथवा बाहर निष्कासित होता है। जब हम शक्ति सिंबल (चो-कु-रे) के संग से-हे-की का आवाह्य करते हैं तो हमारे अव-चेतन मन की दिवार गिर जाती है तथा हमारा सम्पूर्ण मन निर्मल जल स्वरूप शांतचित्त महसूस होता है। इसके प्रयोग की अवस्था:
    मानसिक:- अन्त्र मुखी विचार, भूली बिसरी यादें, अन्त्र ज्ञान।
    संवाद:- विचारों की अभिव्यक्ति उच्चारण।
    भावनायें:- हमारी रूचियें, इच्छायें, भावुक विचार, पुराने लय-बद्ध क्रिया कलाप।
    आत्मिक:- पूर्वाभास, महान-आत्माओं से संवाद, सच्चा-सुच्चा मन।
    हमारी भावनायें इस प्रकार प्रगट हो सकती हैंः
    (i) मेरे अन्त्र मुखी विचारों तथा इच्छाओं को एकसुर करो।
    (ii) मेरी वाणी और विचारों को एकसुर करो।
    (iii) मुझे सच्चे विश्वास तथा सच्चे मन की अभिव्यकित प्रदान करो।
    (iv) मुझे पूर्व-आभास की शक्ति प्रदान करो ताकि मेरा उच्चारण संतुलित हो।
    (v) मेरी याद-शक्ति को प्रबल करो।
    भाव जो हम कहना चाहते हैं तथा जो हम कहते हैं, इस तालमेल के लिए यह चिन्ह सम्पूर्ण काम करता है।
    सिंबल को कैसे बनाया जाता हैः-
    (i) पहली दो उंगलियों (अंगूठे के साथ की) से।
    (ii) पाँचों उंगलियों को एक-साथ मिला कर।
    (iii) पूरी हथेली के साथ (बड़ी वस्तु के उपयोग हेतु)
    (iv) तीन उंगलियों (अंगूठा, अंगूठी वाली उंगली तथा बड़ी उंगली) को मिला कर।
    (v) आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra) पर आँखें बंद कर ध्यान मुद्रा से (सफैद प्रकाश से।)
    (vi) जीभ की नोक से मुंह में तालु पर।
    (vii) सहस्त्रार चक्र (Crown Chakra) पर सफेद प्रकाश के रूप में, ध्यान मुद्रा में समावेश होता महसूस करना।
    नोट:- किसी भी सूरत में कोई भी सिंबल पहली उंगली (त्रजणी उंगली अर्थात अंगूठे के साथ वाली) से नहीं बनाना।

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