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(शक्ति चिन्ह )चो-कू-रे Cho-Ku-Re

हमारा ब्रह्मांड चक्रीय स्वरूप है। तूफान, चक्रवात, हवा का दबाव, सभी एक चक्र में घूमते हैं। यहां तक कि मानवीय डी.एन.ए. ढांचा भी गोलाकार है। ब्रंह्मड की सभी अनगिणत अकाशगंगायें चक्रों में घूमती हैं।
रेकी का पहला सिंबल भी गोलाकार है, चो-कु-रे एक आदेश की भांति प्रयोग होता है। यह चिन्ह ब्रह्म-स्रोत से ऊर्जा प्राप्त करता है तथा शेष दोनों चिन्हों को भी जागृत करता है। यह शक्तियों को केंद्रित करने की क्षमता देता है।
भारतीय अध्यिातम के अनुसार यह चिन्ह कुण्डिलिनी का प्रतीक है जो साढ़े तीन कुण्डल मार, मूलाधार चक्र पर एक सर्पनि सौ रही है। आध्यिात्मवादी योग साधना के साथ इसको जागृत करते है तथा सीधे आत्मरस को प्राप्त करते हैं।
चो-कु-रे जपानी भाषा का शब्द है जिसका भावार्थ है: एक घुमावदार तलवार जो भू-मण्डल में अपनी काट के द्वारा तत्व, आत्मा तथा शक्ति का आवाह्य करती हैं। इस चिन्ह को किसी भी दिशा में बनाया जा सकता है जो हमेशा शक्ति उद्रित करता है।
इस सिंबल के गुणात्मक पहलूः
(i) हमारे घर, वाहन, चौगिरदे में से नकारात्मक ऊर्जाओं को समाप्त करता है।
(ii) घर / आवास की नकारात्मक तरंगों को नष्ट करने के पश्चात साफ करता है।
(iii) हवा/पानी के अन्दर छुपे रसायनों को शुद्ध करता है।
(iv)बिमारी दौरान कमरे/हस्पतालों की नकारात्मक तरंगों से राहत प्रदान करता है।
(v) ‘पत्र’ द्वारा सकारात्मकता को दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद करता है।
(vi) चिन्ह को पहले हाथ पर बनाने के उपरंत शरीर पर बनाने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।
(vii) दूसरे दो सिंबलों के आगे और पीछे बनाया जाता है जैसे: चो-कु-रे $ से-हे-की $ चो-कु-रे।
(viii) सिंबल हाथ से मानसिक तौर पर बनाने या ध्यान करने के बाद तीन बार इसका उच्चारण किया जाता है।
(ix) चिकित्सा शुरू करने से पहले इस चिन्ह को अपने हाथों पर बनाना चाहिए।
हम शक्ति सिंबल Power Symbol अर्थात चो-कु-रे को रेकी की शक्ति बढ़ाने के लिए प्रयोग करते हैं। रोगी के चौगिरदे से उपचारक-ऊर्जा (Healing Power) को प्रतिबद्ध (seal) करने के लिए प्रयोग करते हैं ताकि उपचारक-ऊर्जा बाहर ना चली जाए।
नकारात्मक मानसिक ऊर्जा का क्षेत्र साफ करने, प्रकाश को सील करने तथा स्थान को पवित्र करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
रेकी व्यक्ति की शरीरिक हानि, शब्दों तथा भावनात्मक टकराव, मानसिक तनाव आदि से बचाव करती है इस लिए शक्ति सिंबल सभी स्तर पर हमारा बचाव करता है।
कमरे की चारो दिवारें, छत तथा फर्श से नकारात्मक ऊर्जा को साफ करने के लिए उपचार में प्रयोग किया जाता है।
सिंबल कैसे बनाया जाये
(i) पूरी हथेली से हवा में बनायें (वक्राकारी वस्तुओं पर बनाने के लिए)।
(ii) पांचों उंगलियों से हवा में।
(iii) दो उंगलियों से (पहली एवं मध्यम)
(iv) तीन उंगलियों से अंगूठे तथा बीच की दो उंगलियां एक साथ इकट्ठी करके (शुभ कारक काम में)।
(v) आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra) के ऊपर आँखें बन्द करके सफेद रंग के धूयें से।
(vi) जीभ की नोक से तालुये पर।
(vii) एक सफेद प्रकाश के रूप में सहस्त्रार चक्र (Crown Chakra) ऊपर कल्पना करंे।

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