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बादाम के फायदे

बादाम के फायदे


बादाम एक ऐसा फल है, जो सदा से ही बहुत उत्तम माना जाता है। स्वस्थ रहने के लिए गुणों की खान बादाम का सेवन कुछ मात्रा में जरूर करना चाहिए। बादाम में प्रोटीन, वसा, विटामिन और मिनेरल पर्याप्त मात्रा में होते हैं। इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए परम उपयोगी होता है। यह ना केवल प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है, बल्कि इसके सेवन से खांसी, डायबिटीज़, एनीमिया, पथरी जैसी समस्याओं में भी इसका सेवन किया जा सकता है।
अफगानिस्तान, इराक और अमेरिका के बादाम जगत प्रसिद्ध हैं। आस्ट्रेलिया, कैलिफोर्निया, अफ्रीका, भारत भी बादाम उत्पादन वाले राष्ट्र हैं। यदि बादाम मीठा हो तो मन एवं मस्तिष्क को आंनद मिलता है। यदि कड़वा हो तो हम तुरंत थूक देते हैं। कड़वा बादाम शरीर में जाकर बेचैनी पैदा करता है। इससे बचना चाहिए।
बादाम कई प्रकार के होते हैं जैसे कच्चा बादाम दस्तावर है। इसमें भारीपन होता है। पित्त को उत्तेजित करता हें यह कफ और वायु की बीमारियों को खत्म करता है। पक्का बादाम मीठा और चिकना होता है। इससे वीर्य में वृद्धि होती है और वीर्य गाढ़ा होता हैं यह कफ को पैदा करता है और रक्त पित्त् और वातपित्त को समाप्त करता है।
सूखा बादाम मीठा होता है और धातु में वृद्धि करता है। यह शरीर को सुन्दर व शक्तिशाली बनाता है, पित्त को उत्तेजित करता है तथा वात पित्त और कफ को नष्ट करता है। बादाम की दो जातिया होती हैं एक कड़वी और दूसरी मिठी। मीठा बादाम बाहर से लाल तथा अंदर से सफेद रंग का होता है। यह मीठा और स्वादिष्ट होता है। यह गर्म होता है। यह शरीर में देर से पचता है। शक्कर, मीठा बादाम के दोषों को दूर करता है। चिलगोजे से बादाम की तुलना की जा सकती है। इस के पेड़ बहुत ऊंचे होते हैं। इसके पेड़ अफगानिस्तान और मालद्वीप में अधिक पाये जाते हैं। इसके पत्ते लंबे और गोल तथा फूल छोटे छोटे होते हैं। इसके फल के अंदर जो बीज पाया जाता है उसे ही बादाम कहते हैं। 
कड़वा बादाम का रंग सुर्ख (हल्का लाल और पीलापन) और अंदर सफेद रंग का होता है। कड़वा बादाम का स्वाद कड़वा होता है। कड़वा बादाम, बादाम की ही जाती है। कड़वा बादाम गर्म होता है। कड़वा बादाम अधिक मात्रा में उपयोग आंतों के लिए हानि पहुंचाता है। चीनी, मिश्री, मीठे बादाम का तेल, कड़वा बादाम के गुणों को सुरक्षित रखता है एवं कड़वा बादाम में सम्मिलित दोषों को दूर करता है। कड़वे बादाम की तुलना भी चिलगोजे से की जा सकती है। 
आमतौर पर लोग मानते हैं कि बादाम खाने से मोटापा बढ़ जाता है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है बल्कि अगर बादाम लिमिट में खाया जाए तो यह फैट बढ़ाने की बजाय हमें फायदा पहुंचाता है। रोजाना बादाम के 5-7 दाने खाने से मोटापा नहीं बढ़ता, बल्कि कई बीमारियों से बचाव होता हैं दरअसल बादाम में दूसरे नट्स के मुकाबले काफी पौष्टिक तत्व होते हैं। बादाम में कैल्शियम, पोटाशियम और मैग्निशियम आदि काफी मात्रा में होते हैं। हालांकि बादाम में कैलरीज़ होती है, लेकिन यह बॉडी के लिए नुकसारदेह नहीं होता। यह एंटीऑक्सिडैटस भरपूर होता है। 
बादाम को हलुआ और खीर, आईसक्रीम, बर्फी या किसी भी मिठाई में डालें तो हम मन चाहा आनंद प्राप्त कर सकते हैं। बादाम पीसकर उसका शरबत भी बनाया जाता है, जो गर्मियों में शीतल पेय का काम करता हैं यह जिगर, गुर्दे एवं पेट के लिए लाभदायक रहता है। गर्मियों में बादाम की ठंडाई मनाई जाती है। बादाम में खसखस, काली मिर्च पीस कर चीनी डालकर बनाया गया शर्बत स्मृतिवर्धक एवं शांति प्रदायक होता है।
बादाम खाने का सर्वोत्तम तरीका है कि उसे रात्रि में पानी में भिगो देना चाहिए। प्रातः छिलका उतारकर उसे पानी या दूध के साथ खा लेना चाहिए। बच्चों के लिए यह स्मृतिवर्धक है। बादाम का छिलका कब्ज करता है। छिलका उतारकर खाएं तो ज्यादा पौष्टिक रहता है। तुरन्त छिलका उतारना हो तो इसे दो मिनट तक पानी में उबाले और बाद में छिलका उतार लें। बादाम का छिलका जलाने के बाद उससे दंत मंजन बनाया जा सकता है।
बादाम के छिलके में पाया जाने वाला फलावोनोइड्स गरी के विटामीन ई के साथ मिलकर एंटीऑक्सीडैटस की प्रक्रिया को दोगुनी गति से बढ़ाते हैं। बादाम के छिलकों में लगभग 20 किस्म के पोषक एंटीऑक्सीडैटस भी है जो बहुत लाभदायक है।
बादाम खाने के बाद किए गए ब्लड टेस्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि बादाम को छिलके सहित खाने से फलावोनाइड्स और विटामिन ई की मात्रा बढ़ी हुई मिली। इसका बहुत फायदा होता है, खासतौर पर बढ़ती उम्र में यह ज्यादा लाभदायक होता है। बादाम विटामीन ई का सबसे अच्छा स्रोत है। लगभग 28 ग्राम बादाम शरीर को मैगनीज़, मैग्नेशियम, कॉपर, विटामीन बी-2 और फास्फोरस देती है। हालाँकि डाइट कांशस लोगों के लिए यह तय करना एक मुश्किल काम होता है कि कितनी मात्रा में नट्स खाए जाएँ कि उनका प्लान गड़बड़ न हो, क्योंकि इनमें ज्यादा कैलोरी भी होती है।
अगर हम बादाम का हफ्ते में कम से कम 5 दिन बादाम का सेवन करते हैं, हमें हृदयघात का खतरा सामान्यत लोगों से 50 प्रतिशत तक कम होता है। बादाम में मोनोसैचुरेटेड और पॉलीसैचुरेटेड फैट होता है, जो कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकता है। बादाम के अन्दर विटामिन ई भी होता है जो कि एंटीओक्सिडैंट की तरह कार्य करता है और हृदय की बीमारियों के खतरे को कम करता है। बादाम के अन्दर मैग्नीशियम भी होता है जो दिल के दौरे को ठीक करने में मदद करता है। बादाम में मौजूद फॉलिक एसिड बॉडी में होमोसिस्टीन (एक प्रकार का अमीनो अम्ल) की मात्रा को ठीक रखता है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियां होने की संभावना बेहद कम हो जाती है।
शरीर में किसी भी प्रकार की सूजन हो तो उसे ठीक करने के लिए बादाम प्रयोग किया जाता है। यह शरीर के अंदर खराब खून को बिल्कुल साफ कर देता है। जिससे चर्म रोगों (त्वचा संबंधी रोगों) से छुटकारा मिलता है। इसका उपयोग सूखी और सर्द दोनों ही प्रकार की खांसियों के लिए लाभदायक होता है। यह छाती की हलचल (खरखराहट) और फेफड़ों की सूजन को खत्म करता है। हृदय की बीमारी और कामला (पीलिया) को ठीक करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। यह पथरी को भी गलाता है।
बादाम रक्त संचार को ठीक रखने में मदद करता है। बादाम में कैल्शियम की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इससे हड्डीयां भी मजबूत होती हैं। बादाम में मूल रूप से प्रोटीन 16.5प्रतिशत और तेल 41 प्रतिशत का मिश्रण समाया होता हैं बादाम का चाहे जिस रूप में सेवन किया जाए, यह तय है कि उनमें समाए चिकित्सकीय गुणों का पूरा लाभ व्यक्ति को मिलता है। संतुलित भोजन के इस प्रमुख स्रोत को सबसे सेहतमंद मेवा बताया गया है। 
बादाम मस्तिष्क और स्नायु प्रणालियों के लिए पोषक तत्व है। यह बौद्धिक ऊर्जा बढ़ाने वाला, दीर्घायु बनाने वाला है। शुद्ध बादाम तेल तनाव को दूर करता है। दृष्टि पैनी करता है और स्नायु के दर्द में भी राहत दिलाता है। बादाम तेल का प्रयोग हर रोज रात को 250 मिग्रा गुनगुने दूध में 5-10 मिली बादाम तेल मिलाकर सेवन करना लाभकारी है। बादाम में फोलिक एसिड होता है जिससे स्त्री के गर्भ में पैदा होने वाले बच्चक स्वस्थ पैदा होते हैं। 
प्राकृतिक चिकित्सा प्रणालियों जैसे यूनानी में बादाम को खासतौर से बादाम तेल को पूरे परिवार के लिए स्वास्थ्यवर्धक टॉनिक माना जाता है। रक्ताल्पता (एनीमिया) के उपचार में कारगर (इसमें मौजूद लौह तत्व और विटामिनों की बदौलत) बादाम को मानसिक थकान, कब्ज, नपुंसकता और श्वास संबंधी विकारों के इलाज में भी काफी प्रभावी पाया गया है।





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