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लघु या कॉम्पेक्ट गर्दन

लघु या कॉम्पेक्ट गर्दन


कॉम्पेक्ट गर्दन का सबसे अच्छा नमूना हाथी की गर्दन है। हाथी की गर्दन शरीर से बिल्कुल सटी रहती है। हृदय और मस्तिष्क के बीच दूरी कम होने से मस्तिष्क हृदय द्वारा प्रवाहित रक्त को तुरन्त प्राप्त कर लेता है। यदि मस्तिष्क में गुणवत्ता मौजुद हो, तो कार्य कुशलता अच्छी होगी। लघु या कॉम्पेक्ट गर्दन की पहचान बहुत आसानी से की जा सकती है। कॉम्पेक्ट गर्दन वाले व्यक्तियों का सिर प्रायः कन्धों पर आधारित सा मालूम पड़ता है और शरीर का आकार सिर की अपेक्षा अधिक भारी होता है। फ्रांस के शासक नेपोलियन बोनापार्ट की गर्दन लघु या कॉम्पेक्ट प्रकार की गर्दन का उत्कृष्ट नमूना थी। नेपोलियन की गर्दन बहुत छोटी थी, उसका सिर कन्धों पर रखा हुआ सा प्रतीत होता था और उसके पैर भी छोटे थे। कुल मिलाकर उसके शरीर की आकृति ढोलाकार थी। नेपोलियन का कहना था कि असंभव शब्द मूर्खों के शब्दकोष में पाया जाता है। उसने अपनी योग्यता और क्षमता से संपूर्ण विश्व को प्रभावित कर दिया था।
आसपास मौजूद किसी भी खतरे का आभास होते ही आँखें तुरन्त उस दिशा में घूम जाती हैं। आँखों को खतरे की दिशा में घुमाने में गर्दन की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। लम्बी गर्दन वाले व्यक्तियों या जीवों को इधर उधर देखने के लिए अपने शरीर को घुमाना नहीं पड़ता, यह कार्य मात्र गर्दन के घुमने से ही हो जाता है। जैसे हाथी की गर्दन कॉम्पैक्ट होती है, इसलिए वह केवल सामने ही देखता है, अगल बगल देखने के लिए उसे पूरा शरीर घुमाना पड़ता है। वह गर्दन घुमाकर अगल बगल नहीं देख सकता।
लघु का काम्ॅपैक्ट गर्दन वाले व्यक्ति शारीरिक रूप से बलिष्ठ होते है, किन्तु वे आसपास के वातावरण और खतरों के प्रति जागरूक नहीं होते। उनकी इस कमजोरी का फायदा उनके शत्रु ही उठाते हैं और समय आने पर उन्हें गहरी हानि पहुंचाते हैं। ऐसे व्यक्ति परिश्रम और अपनी धुन के पक्के होते हैं तथा दुनिया की परवाह किये बगैर अपने कार्यों में तन्मयतापूर्वक लगे रहते हैं। वे मनमौजी, असावधान और दृढ़ निश्चयी होते हैं, उन्हें औरों की आलोचना से दुःख तो होता है, फिर भी वे छोटी-मोटी मुसीबतों को झेलने के आदी होते हैं। उनके इरादे पक्के होते हैं। हाथ में शक्ति आने पर ऐसे लोग अनियन्त्रित, स्वेच्छाचारी और अधिनायक भी हो जाते हैं। इनका मस्तिष्क बहुत सक्रिय होता है। अपनी योजनाओं को साकार रूप देने में, साहसिक कार्य सम्पादित करने में वे अपनी सूझ-बूझ, विलक्षण बुद्धि, दूरदर्शिता का परिचय देते हैं। यद्यपि ऐसे लोग सौम्य स्वभाव व अहिंसक प्रवृत्ति के होते हैं, तथापि विषम परिस्थितियों में इनका स्वभाव हिंसक और अतिउग्र हो जाता है, तब इन पर किसी के समझाने बुझाने का कोई असर नहीं होता। ऐसी स्थिति में ये अमानवीय, पाशविक प्रवृत्तियों को ग्रहण कर लेते हैं और अनियन्त्रित व्यवहार करते हैं।
सुडौल गर्दन (।तजपेजपब वत ठंसंदबम छमबा)
सुडौल या कलात्मक गर्दन उपयुक्त अनुपात, कलात्मक बनावट, सुन्दर आकृति, सन्तुलन और स्निग्धता को प्रदर्शित करती है। कला एवं साहित्य के क्षेत्र में सुराहीदार गर्दन, कम्बु गर्दन, ळतंबमनिस छमबाए त्वनदकमक छमबाए ठंसंदबम छमबाए ब्वततमबज च्तवचवतजपवदंजम छमबा आदि का वर्णन किया गया है। प्राचीन शिल्प, चित्रकला, साहित्य एवं संगीत में कलात्मक गर्दन को ही चित्रित किया गया है। सुडौल गर्दन देखने में सुन्दर, कलात्मक बनावट वाली, सन्तुलित आकृति की होती है, जो व्यक्ति के विचारों की स्निग्धता, कोमलता, सहजता, ऐश्वर्य, वैभव, काम-भोगवादिता, कलात्मक अभिरुचि व वातावरण के प्रति संवेदनशीलता की परिचायक होती है। ऐसी गर्दन सामान्य लम्बाई वाली एवं परिधिपूर्ण होती है। सुडौल गर्दन वाले व्यक्ति भावुक, कलाप्रेमी, मानवीय गुणों एवं संवेदनाओं के पारखी तथा भावनाओं को महत्त्व प्रदान करने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति संगीत, कला, अभिनय, साहित्य व ललित कलाओं की ओर सहज ही आकर्षित होने वाले उत्तम कोटि के कलाकार होते हैं। इनका व्यक्तित्व भी प्रभावशाली एवं आकर्षक होता है, किन्तु सांसारिक छल-कपट और दुनियादारी में निपुण न होने के कारण दूसरों द्वारा इनका शोषण किया जाता है।
सुडौल गर्दन वाले व्यक्ति, दयालु, गम्भीर, स्वाभिमानी, सरल, यशोभिलाषी, एकान्तप्रिय, मनमौजी, अपने विचारों में खोये रहने वाले व आत्मकेन्द्रित होते हैं। ऐसे व्यक्ति दुसरों की भावनाओं को समझ कर चलते हैं। ये समाज में धर्म प्रचार, शिक्षा, सेवा, कला, संगीत के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाते हैं। विपरीत सेक्स के प्रति सहज ही आकर्षित होने वाले, उच्च आदर्श के मार्ग पर चलने वाले, कामुक, प्रेमी, व्यवहारकुशल, विख्यात, भोग-विलास में प्रवीण, आध्यात्मिकता एवं भौतिकता के बीच सन्तुलन स्थापित करके चलने वाले, चुम्बकीय व्यक्तित्व के धनी होते हैं।
कलात्मक र्गदन को देखकर बहुत आसानी से पहचाना जा सकता है। इसकी मोटाई, लम्बाई, गठन, आकार मध्यम कोटि का, किन्तु सन्तुलित और कलात्मक होता है। शरीर के अन्य अंगों यथा कन्धों, सिर एवं धड़ के साथ उपयुक्त मेल एवं संतुलन को देखकर कलात्मक गर्दन की पहचान आसानी से की जा सकती है।





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