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घटायें चर्बी जांघों एवं पैरों की

घटायें चर्बी जांघों एवं पैरों की


सुंदर और सुडौल पैर पाना हर लड़की का सपना होता है। पैर अगर सुडौल हो तो जींस भी आराम से आ जाती है और शरीर भी सुंदर लगता है। अगर शरीर हल्का हो और पैर में चर्बी ज्यादा हो तो हम चाहध् जो भी कपड़ा पहन लें खराब ही लगता है। यदि हमारी जांघों में काफी चर्बी जमी हुई है तो हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए। सुडौल पैर पाने के लिए हर रोज 30 मिनट तक दौड़ना चाहिए। जिससे जांघों से चर्बी घटती है। इसके अलावा हमें अपने खाने पीने पर भी ध्यान देना चाहिए। बाजार के खाने से बचना चाहिए। हमेशा फाइबर युक्त और पौष्टिक खाना खाना चाहिए। इसके अलावा हमें पैदल चलना चाहिए और कुछ एक्सरसाइज या योगा आसन करने चाहिए।
गरुड़ासन
हमें ताड़ासन में खड़े हो जाना चाहिए। दाहिना पैर उठाना चाहिए और बाएँ पैर पर इस प्रकार लपेट लेना चाहिए कि दाहिनी जाँघ पर और दाहिना पैर बाईं पिंडली को स्पर्श करना चाहिए। इसके बाद हाथों को भी कोहनियों से मोड़कर आपस में लपेट लेना चाहिए व दोनों हथेलियों को आपस में प्रार्थना की मुद्रा में जोड़ लेना चाहिए। फिर वापस मूल स्थिति अर्थात ताड़ासन में आ कर जितने समय के लिए हो सके फिर से पैरों और हाथों को बदलकर यह क्रिया करनी चाहिए।
इस आसन में 15-20 सेकंड तक रूकना चाहिए। गहरी साँस लेते रहना चाहिए। पूर्ण आसन में धीरे धीरे गहरे श्वास लेने चाहिए। हमारा ध्यान हमेशा आज्ञाचक्र पर होना चाहिए।
जब हमें इस आसन का पूर्ण अभ्यास हो जाए तो फिर हमें धीरे धीरे सामने की तरफ झुककर हाथों से जमीन को स्पर्श करने की कोशिश करनी चाहिए।
इस आसन से टखनों का सही विकास होता है। एकाग्रता बढती है। शरीर के संतुलन का अभ्यास भी बड़ता है। साइटिका और पिंडलियों की माँसपेशियों की ऐंठन को रोकने के लिए बहुत लाभदायक आसन है। जांघों की चर्बी को कम करने में मदद करता है।
उत्तानासन
दोनों पैरों के बीच लगभग दो से ढाई फिट की दूरी बनाकर सीधे खड़े हो जाता चाहिए। पैरों के पंजों को बाहर की तरफ मोड़ कर खड़े हो जाना चाहिए। अब हमें दोनों हाथों को पेट के सामने की तरफ लंबवत् रूप में एक दूसरे में फँसा कर लटका लेना चाहिए या छाती के सामने हाथ जोड़ लेने चाहिए।
श्वास छोड़ते समय धीरे धीरे नीचे की तरफ बैठें। घुटने बाहर की तरफ पंजे के ऊपर स्थित होने चाहिए। श्वास लेते हुए वापस उसी स्थिति में खड़े हो जाना चाहिए। इस अभ्यास में क्रमशः जितना अधिक संभव हो उतना नीचे बैठने की कोशिश करनी चाहिए। अभ्यास के दौरान मेरुदण्ड सीधा एवं दृष्टि सामने रखनी चाहिए यह क्रिया हम 5 से 10 बार कर सकते हैं।
बैठते समय हमें घुटने बाहर की तरफ ही मोड़ने चाहिए। यदि पहली बार में बैठते न बने तो पहले 1 फिट तक नितंबों को नीचे करें फिर डेढ फिट करना चाहिए। फिर अभ्यास हो जाने के पर पूरा बैठने की कोशिश करनी चाहिए। 
पैरों की माँसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है। जाँघ, घुटने व पिंडली को मजबूती प्रदान करता है। प्राण के प्रवाह को नियमित करता है। मूत्राशय एवं गर्भाशय को लाभ मिलता है। पीठ के सामान्य विकार दूर करता है। टखने, घुटने एवं कमर की संधियों को उचित लाभ प्रदान करता है।
कागासन
काग एक पक्षी का नाम है जिसे हम ज्यादातर कौआ के नाम से जानते हैं। इस आसन में सबसे पहले सावधान की स्थिति में खड़े हो जाना चाहिए। इसके बाद दोनों पैरों के बल इस प्रकार बैठना चाहिए कि पैरों के बीच बिल्कुल अन्तर न रहे। दोनों हाथों को घुटनों पर रखना चाहिए साथ में कोहनियों को जंघाओं, छाती व पेट के बीच में स्थित कर देना चााहिए। कमर, मेरुदण्ड और गर्दन सीधी रखनी चाहिए।
श्वास प्रक्रिया सामान्य रखनी चाहिए। 2-3 मिनट तक हम इस आसन की स्थिति में बैठ सकते हैं। इससे हमारी जांघे सुन्दर व सुडौल बनती है। वायु विकार का शमन होता है। 





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