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स्मृति वर्धक ब्राह्मी

स्मृति वर्धक ब्राह्मी


यदि व्यक्ति का दिमाग तेज है तो फिर वो जग जीत सकता है। यदि मनुष्य का दिमाग स्वस्थ है तो फिर चिंता की कोई बात नहीं है। दिमाग की तरोताजगी के लिए आयुर्वेद में ब्रहमी विशेष उपयोगी एंव लाभकारी मानी गयी है क्योंकि यह मानव मस्तिष्क की मेघा शक्ति को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ब्राह्मी का पौधा हिमालय की तराई में हरिद्वार से लेकर बद्रीनारायण के मार्ग मंे अधिक मात्रा में पाया जाता है। जो बहुत उत्तम किस्म का होता है। ब्राह्मी पौधे का तना जमीन पर फैलाता जाता है। जिसकी गांठों से जड़, पत्तियां, फूल और बाद में फल भी लगते हैं। ब्राह्मी के फूल छोटे, सफेद, नीले और गुलाबी रंग के होते हैं। ब्राह्मी के फलों का आकार गोल लम्बाई लिए हुए तथा आगे से नुकीलेदार होता है जिसमें से पीले और छोटे बीज निकलते हैं। ब्राह्मी की जड़े छोटी और धागे की तरह पतली होती है। इसमें गर्मी के मौसम में फूल लगते हैं।
ब्राह्मी एक तरह का पौधा है जिसे अंग्रेजी में ठंबंचं डवददपमतप कहा जाता है।ह पौधा नम स्थानों में पाया जाता है, तथा मुख्यतः भारत ही इसकी उपज भूमि है। इसे भारत वर्ष में विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे हिन्दी में सफेद चमनी, संस्कृत में सौम्यलता, मलयालम में वर्ण, नीरब्राम्ही, मराठी में घोल, गुजराती में जल ब्राह्मी, जल नेवरी आदि तथा इसका वैज्ञानिक नाम बाकोपा मोनिएरी है।
ब्राह्मी से मिलते जुलते रंग रूप वाली तथा लगभग इन्हीं गुणों वाली दूसरी औषधी मंगूकपर्णी भी है। इन दोनों में भेद मुश्किल से हो पाता है। इसलिए ये दोनों ही मिलीजुली उपलब्ध होती हैं। ब्राह्मी के पौधे जमीन पर फैले, इसके पत्तों का अग्रभाग गोलाकार डंठल की तरह पत्ते संकरे इन पर छोटे-छोटे निशान फूल नीलिमा युक्त सफेद मोटाई अपेक्षाकृत कम तथा इसकी हर शाखा में से जड़ें निकलकर जमीन में घुसती जाती हैं। जबकि मंडुक पर्णी के पत्ते अपेक्षाकृत मोटे पत्ते का अग्रभाग नोकदार डंठल की तरह चौड़ा तथा फूल लाल होते हैं।
ब्राह्मी के पत्ते कुछ बड़े होते हैं। इसके डालों से भी जड़ें निकलकर पृथ्वी में घुसी रहती हैं। ब्राह्मी स्वाद में कड़वी होती है।
इसमें ब्राह्मी नामक एक उपक्षार मिलता है। जो छोटी मात्रा में रक्तचाप बढ़ाता और हृदय  को मांसपेशियों, श्वास प्रणाली, गर्भाशय और छोटी आंतों को उत्तेजना प्रदान करता है। इसमें कुछ कुचले जैसा पर उससे कम विषैला असर भी होता है। ब्राह्मी में एक उड़नशील तेल मिलता है जो इसे धूप में सुखाने या आग पर गर्म करने से उड़ जाता है। यह तेल इसके गुणों का मुख्य आधार है अतः इसे बचाना चाहिए।
ब्राह्मी हिस्टीरिया, अपस्मार (मिर्गी) तथा उन्माद रोगों में बहुत लाभदायक पाई गई है। इसके सेवन से इन तीनों रोगों में उल्लेखनीय लाभ मिलता है। इसके साथ शंखपुष्पी, बच तथा कूठ का मिश्रण अत्यधिक गुणकारक असर करता है तथा ब्राह्मी की विषाक्तता को कम करते हैं। ब्राह्मी मस्तिष्क को पुष्टि व शांति देती है। इसके प्रयोग से मज्जा तंतुओं के रोग मिटते हैं। अनावश्यक तथा अनर्गल बोलना, शीघ्र उतेजित हो जाना, चारो तरफ से उदासीनता बनाना मिर्गी के दौरों की तीव्रता, अवधि तथा आवृत्ति में ब्राह्मी के उपयोग से कमी आती है व हिस्टीरिया पूरी तरह मिट जाता है।
ब्राह्मी से ब्राह्मी घृत, सारस्वत घृत, सारस्वत चूर्ण, सारस्वतारिष्ट, ब्राह्मी रसायन, ब्राह्मीवटी, ब्राह्मी चूर्ण, ब्राह्मी शर्बत आदि शास्त्रोत नुस्खों के अलावा प्रायः हर आयुर्वेदिक ओषधि निर्माता कंपनी अपने पृथक-पृथक प्रोप्रायटरी योग बनाकर अनेक टेब्लेट, सीरप, कैप्सूल वगैरह बनाते हैं। पर इस बात से सभी सहमत हैं कि ब्राह्मी मस्तिष्क, हृदय, मज्जा, तंतुओं के रोगों, अनेक मानसिक रोगों तथा स्नायु तंत्र के रोगों में आयुर्वेद का गरिमापूर्ण प्रतिनिधित्व कर मानस रोगियों का कल्याण करती है।
छाया में सुखाये ब्राह्मी के पत्ते, शंखपुष्पी पंचांग, बचदूधिया, कूठशतावर, विदारीकंद, छोटी इलायची, छिले हुए बादाम, मालकांकनी तथा जटामांसी का चूर्ण बनाएं। अन्य चीजों से जटामांसी आधी, बच चौथा भाग लें। चूर्ण को पांच ग्राम की मात्रा में पानी के साथ चटनी की तरह पीस गाय के मीठे दूध तथा दो चम्मच गाय के घी के साथ मिला कर पीवें, स्मरण शक्ति तीव्र होगी, 1 से 3 चम्मच ब्राह्मी के पत्तों का रस, ताजी हरी पत्तियां 10 तक सुखाया हुआ बारिक चूर्ण 1 से 2 ग्राम तक, पंचांग (फूल, फल, तना, जड़ और पत्ती) चूर्ण 3 से 5 ग्राम तक और जड़ के चूर्ण का सेवन आधे से 2 ग्राम तक करना चाहिए।
ब्राह्मी के गुण: ब्राह्मी बुद्धि तथा उम्र को बढ़ाता है। यह रसायन के समान होती है। बुखार को खत्म करती है। याददाश्त को बढ़ाती है। सफेद दाग, पीलिया, प्रमेह और खून की खराबी को दूर करती है। खांसी, पित्त और सूजन को रोकती है। बैठे हुए गले को साफ करती है। ब्राह्मी का उपयोग दिल के लिए लाभदायक होता है। यह उन्माद (मानसिक पागलपन) को दूर करता है। सही मात्रा के अनुसार इसका सेवन करने से निर्बुद्ध, महामूर्ख, अज्ञानी भी श्रुतिधर (एक बार सुनकर जन्म भर न भूलने वाला) हो जाता है।
जिन व्यक्तियों को अनिंद्रा से सम्बन्धित शिकायत रहती है, उन्हें यह प्रयोग करना चाहिए। सोने से 1 घन्टा पूर्व 250 मिली. गर्म दूध में 1 चम्मच ब्राह्मी का चूर्ण मिलाकर नित्य सेवन करने से रात्रि में नींद अच्छी आती है, तनाव से मुक्ति मिलती है एवं स्मरण शक्ति तेज होती है। जिन बच्चों का पढ़ने में मन नहीं लगता एवं घबराते हैं। उनको 200 मि.ली. गर्म दूध में 1 चम्मच ब्राह्मी का चूर्ण नित्य सेवन कराने से स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है तथा पढ़ाई में मन भी लगने लगता है। 
जिन जातकों का चन्द्र ग्रह कमजोर होकर अशुभ फल देता है जिसके कारण वे चिड़चिड़े हो जाते हैं तथा अनिर्णय की स्थिति में रहते हैं। वह लोग भी उपरोक्त विधि का प्रयोग कर सकते हैं। ब्राह्मी को वास्तु की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। जिस घर में ब्राह्मी का पेड़ लगा होता है, उस परिवार के बच्चों की स्मरण शक्ति अच्छी होती है और घर में अचानक दुर्घटना होने की आशंका भी नहीं रहती है।
ब्राह्मी का अधिक मात्रा में सेवन करने से सिर दर्द, घबराहट, खुजली, चक्कर आना और त्वचा का लाल होना यहां तक कि बेहोशी भी हो सकती है। ब्राह्मी दस्तावर (पेट को साफ करने वाला) होता है। अतः सेवन में सावधानी बरतें और मात्रा के अनुसार ही सेवन करें।





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